मोहब्बत की राहों में ठोकर जो खाई,
‘जमाल’ अब ज़खम दिल का भरता नहीं है,
कभी जो मोहब्बत का गुलशन बना था,
वही आज नफरत का आतिश-कदा है ।। 💔
मोहब्बत की राहों में ठोकर जो खाई,
‘जमाल’ अब ज़खम दिल का भरता नहीं है,
कभी जो मोहब्बत का गुलशन बना था,
वही आज नफरत का आतिश-कदा है ।। 💔