मेरी पहली शायरी

मोहब्बत की राहों में ठोकर जो खाई,

‘जमाल’ अब ज़खम दिल का भरता नहीं है,

कभी जो मोहब्बत का गुलशन बना था,

वही आज नफरत का आतिश-कदा है ।। 💔

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